ए जी सुनिए के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
युवा कवि अशोक चक्रधर से खास मुलाकात ...
वाले कवि अशोक चक्रधर क ऐसी ही शख्सियत हैं, जिनकी उपस्थिति ही हमारे अंदर हास्य पैदा कर गम भुलाने को मजबूर कर देती है। आइ करते हैं क खास मुलाकात कवि... देती है। आइ करते हैं क खास मुलाकात कवि अशोक चक्रधर के साथ - प्रश्न : आपका बचपन कहाँ बीता? उत्तर : मेरा बचपन जहाँ बीता वो था ब्रज का क्षेत्र। मेरा जन्मस्थान...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/interview/talk/0906/15/1090615097_1.h... - 9644.00kb
ताजमहल ...
क बार क पति-पत्नी का जोड़ा ताजमहल देख कर आया। पत्नी ने कहा : सुनि जी... आप मेरे लि भी क ताजमहल क्यों नहीं बना देते। पति तुरंत जवाब देता है : पहले तुम मर तो सही, उसके बाद इससे भी बड़ा बनवा दूँगा।...
hindi.webdunia.com/entertainment/humor/joks/0902/06/1090206020_1.htm - 394.00kb
मजाज़ की नज्म आवारा ...
2008( 11:51 IST ) ऎ ग़म--दिल क्या करूँ, ऎ वहशत--दिल क्या करूँ शहर की रात और मैं, . नाशा द-ओ- नाकार ा फिरूँ ( दुखी) ( बेकार) जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा... ऎ ग़म--दि ल क्या करूँ, ऎ वहशत--दिल क्या करूँ ( दिल का दुख) ( दिल की घबराहट) ये रुपहली छाँव ये आकाश पर तारों का जाल जैसे सूफ़ ी का तसव्वुर, जैसे आशिक़ का...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/urdu/nazm/0804/29/1080429009_1.htm - 40.00kb
इंटीग्रेटेड सर्किट का अविष्कार कब और किसने किया था ...
आईडी नहीं है? इसके लि यहाँ क्लिक करें पंजीकरण विशेषज्ञ का उत्तर इंटीग्रेटेड सर्किट का अविष्कार इंग्लैंड के जी.डब्लू.. डुमर ने सन्‌ 1952 में किया था... का अविष्कार इंग्लैंड के जी.डब्लू.. डुमर ने सन्‌ 1952 में किया था 18 May, 2009 11:15 PM आपत्तिजनक सूचित करे कृपया लॉगिन करें वेबदुनिया आईडी: पासवर्ड:...
quest.webdunia.com/hindi/computers-general/2/125/13166/0/question.html - 261.31kb
मोमिन की ग़ज़लें ...
क़त्लेआम वो अग़यार के लि दस-बीस रोज़ मरते हैं दो-चार के लि देखा अज़ाब--रंज दिल--ज़ार के लि आशिक़ हु हैं वो मेरे आज़ार के लि ले तू ही भेज दे कोई पैग़ामे--तल्ख़... तू ही भेज दे कोई पैग़ामे--तल्ख़ अब तजवीज़ ज़ेहर है तेरे बीमार के लि आता नही है तू तो निशानी ही भेज दे तसकीन--इज़तेराब--दिल--ज़ार के लि चलना तो देखना के...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/urdu/aadab/0812/22/1081222063_2.htm - 2032.00kb
हसीनाओं के कुत्ते भी कर रहे हैं डेटिंग ...
लद ग दिन आदमियों की डेटिंग के, अब तो कुत्ते जाँगे डेट पर और बाँटेंगे प्यार। जी हाँ, मशहूर अदाकारा पेरिस हिल्टन चाहती हैं कि उनकी प्यारी कुतिया टिंकरबेल... कुत्ते के साथ डेट पर जा। फीमेलफर्स्ट के अनुसार, 28 साल की ‘होटल प्रिंसेज’ पेरिस की ख्वाहिश है कि उनकी दुलारी कुतिया टिंकरबेल ‘गर्ल्स लाउड’ की सुंदरी...
hindi.webdunia.com/news/news/international/0909/20/1090920034_1.htm - 1586.00kb
ग़ालिब का ख़त-4 ...
का हरकारा आया, 'जानी जी' का ख़त लाया। उसको पढ़ा। अब मुझको ज़रूर हुआ कि खुलासा उसका तुमको लिखूँ। यह रुक्क़ा लिखा। खुलासा बतरीक--जाज़ यह है कि अ़र्जी... लिखा। खुलासा बतरीक--जाज़ यह है कि अ़र्जी गुज़री, दीवान गुज़रा, रावल जी के नाम का खत गुज़रा। राजा साहिब दीवान के देखने से खुश हु। जानी जी ने जो क मोतमिद...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/urdu/galibletters/0807/16/1080716081_... - 2164.00kb
Literature : Neeraj..................................... ...
आग तब पानी बनाने के लि- रात भर रो र ो, दीया जलता रहा । > जी उठे शायद शलभ इस आस मे ं रात भर रो र ो, दीया जलता रहा । बिजलियों का चीर पहने थी दिश ा, आँधियों... दिश ा, आँधियों के पर लगा थी निश ा, > पर्वतों की बाँह पकड़े था पव न, सिन्धु को सिर पर उठा था गग न, सब रुक े, पर प्रीति की अर्थी लि , आँसुओं का कारवाँ...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/neeraj/0801/17/1080117094_... - 44.56kb
है ग़लत गर गुमान में कुछ है ...
आन में कुछ है बेखबर तेग़ यार कहती है बाक़ी इस नीम जान में कुछ है इन दिनों कुछ अजब है मेरा हाल देखता कुछ हूँ ध्यान में कुछ है और भी चाहि सो कहि अगर दिल... में कुछ है और भी चाहि सो कहि अगर दिल नामेहरबान में कुछ है दर्द तू जो करे है जी का ज़ियाँ फ़ायदा इस ज़ियान में कुछ है...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/urdu/aadab/0804/01/1080401037_1.htm - 30.94kb
प्रधानमंत्री ने ठोंकी इसरो की पीठ ...
के सफल प्रक्षेपण के लि इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन) के वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाई। इसरो के अध्यक्ष जी. माधवन नायर की अगुआई में संगठन के शीर्ष... अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के क दल ने प्रधानमंत्री को पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीलवी) का मॉडल तथा कार्टोसेट दो- द्वारा ली गई राष्ट्रीय राजधानी के उपग्रह...
hindi.webdunia.com/news/news/national/0805/05/1080505064_1.htm - 29.27kb