कथासागर के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
Treasure of Literature ...
' Webdunia Hindi: विविध साहित्य कथासागर" href="/contmgmt/xmlfeeds/rss/miscellaneous_literature_storiesxml" / कथासागर कथासागर 13 अक्टूबर 2007 पिछले सन्दर्भ...
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श्याम बेनेगल ...
1975 * मंथन 1976 * भूमिका 1976 * कोंडुरा (कन्नड़) 1977 * अनुग्रहम (हिन्दी) 1977 * जुनून 1978 * कलयुग 1981 * आरोहण 1982 * मंडी 1983 * त्रिकाल 1985 * सूरज का सातवाँ घोड़ा 1992 * मम्मो 1994 * मेकिंग ऑफ मह...
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किसकी चलती है ...
में पूछा, 'किसकी चलती है?' एकदम बहु सारे उत्तर आए, बहुतों ने कहा 'जहाँपनाह, आपकी चलती है,' कुछेक ने कहा, 'जहाँपनाह, नीचे तो आपकी ही चलती है पर ऊपर खुदा की चलती है।' बादशाह को संतोष नहीं हुआ। उसने बीर...
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एक भला मानुस ...
संध्या के करीब 7-8 बजे का वक्त था। कुछ गर्मी से और भोजन करके आने के कारण बस में बैठते ही मुझे पानी की प्यास लगने लगी, जो निरंतर बढ़ती जा रही थी। पानी की बोतल भी उस दिन साथ नहीं थी। कहीं भी बस इतनी देर...
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दहलीज ...
होकर भी 'वह' मेरे ही बारे में सोचती है। हर वक्त 'उसे' मेरी ही चिन्ता सताती है। मुझे (दहलीज) पार करने से भी 'वह' डरती है। मेरे प्रति आबद्ध-प्रतिबद्ध होकर भी अक्सर 'वह' मुझे (दहलीज) लाँघने के बारे में ...
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विक्षिप्त कौन? ...
कहते थे वह अर्धविक्षिप्त है। न जाने किस काली घड़ी में किसी की पाशविकता के चलते, हर पाप से अनभिज्ञ उस अधपगली का उदर उभर आया। उसे देख शीला के मन में यकायक एक विचार कौंध उठा,' वो तो अर्धविक्षिप्त है लेक...
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गरीब की मजबूरी ...
शिक्षक पात्रता परीक्षा का आवेदन फॉर्म लेने गया था। फॉर्म लेने हेतु लंबी कतार लगी थी। उसी कतार में मेरे मित्र से कुछ आगे एक सज्जन लगे थे। वेशभूषा में वे काफी गरीब मालूम होते थे। वे अपनी बिटिया (पुत्री...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/stories/0903/30/1090330044... - 1798.00kb
तसल्ली की परिभाषा ...
पूछा - 'क्या बात है शकुंतला?' कुछ मत पूछो बाई साब। मेरे तो करम ही फूटे हैं। मेरा मरद... वो दूसरी के साथ...।' उसका तो महीनों से दूसरी औरत के साथ संबंध था, आज क्या नई बात हो गई? मेमसाब ने उसे बीच में ह...
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एक शहर हुआ करता था ...
परिंदा। सड़कें हैं पर वीरान हैं, फैक्टरियों के हमेशा घूमने वाले चक्के पूरी तरह जाम हैं। हाट बाजार अब यहाँ किसी रोज नहीं सजते और न ही कहीं नुमाइशें या मेले ही भरते हैं। स्कूलों और कॉलेजों के प्रांगण अर...
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मुखौटे ...
लेट हो गईं। स्वाभाविक रूप से पूछा ‍गया कि कहाँ अटक गई थीं? बोलो - आँख में कुछ गिरा था, सो डॉक्टर के यहाँ होती हुई आई। उनका क्लिनिक तो दूर है ना'। इस पर उनकी एक सहेली बोली - 'अरे। तुम्हारे घर के उधर ह...
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