जज़्बाएदिल के लिए खोज परिणाम ( 1-1 )
इश़्क पे ज़ोर नहीं ...
मैं बुलाता तो हूँ उसको, मगर ऐ जज़्बा-ए-दिल उस पे बन जाये कुछ ऐसी कि बिन आये न बने खेल समझा है, कहीं छोड़ न दे, भूल न जाये काश यूँ भी हो कि बिन मेरे सताये न बने ग़ैर फिरता है लिये यूँ तेरे ख़थ को कि अ...
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