धर्म आलेख के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
बुद्धिमान नहीं थे स्वामी विवेकानंद ...
की उम्र तक भी स्वयं के धर्म, देश और समाज के दर्शन और इतिहास को किसी भी तरह से समझ नहीं पाते....। वे तो सिर्फ धर्म के तथाकथित ठेकेदारों और राजनीतिज्ञों... पाते....। वे तो सिर्फ धर्म के तथाकथित ठेकेदारों और राजनीतिज्ञों द्वारा हाँके जाते हैं। फिर क्यों वे विवेकानंद को मानते हैं? और भी......
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कथा आयोजन और दक्षिणा ...
को चमका रही हैं। धर्म संस्थानों और संगठनों या साधु-बाबाओं की शिष्य मंडलियाँ इस काम में बड़ी जिम्मेदारियाँ उठाती हैं। लोगों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में... जुटाना उनका पहला शिष्य-धर्म होता है। एक धर्म संस्थान में होने वाले कार्यक्रम के लिए श्रोताओं को लाने का फॉर्मूला समझाते हुए एक स्वामीजी ने कहा कि शिविर...
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शील-सदाचार ही सच्चा धर्म है ...
खाल बाल की खेंच मत, चाख धर्म का स्वाद॥ धर्म का सही मूल्यांकन करना सीखें। यदि सही मूल्यांकन करते रहेंगे तो दृष्टि सम्यक रहेगी, नीर-क्षीर विभाजन-विवेक कायम... कायम रहेगा, धर्म-पथ पर अपना संतुलन बनाए रख सकेंगे। अन्यथा धर्म का कोई एक अंग आवश्यकता से अधिक महत्व पाकर धर्म-शरीर की सर्वांगीण उन्नति में बाधक बन जाएगा।...
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अनासक्त कर्म : ईश्वर दर्शन का सच्चा मार्ग ...
कारण उसने गृह त्याग कर दिया। जंगल में जाकर रहने लगे। कंद-मूल खाकर गुजारा करते, पेड़ों की छाया में रहते और अपने इष्ट देवता का स्मरण करते। इस तरह समय बीतने लगा, लेकिन एक खालीपन निरंतर महसूस होता था। ईश्...
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विकास का रास्ता स्वयं बनाएँ ...
की है। लक्ष्य हमें धर्म एवं दर्शन से प्राप्त करने हैं। धर्म ही ऐसा तत्व है जो मानव मन की असीम कामनाओं को सीमित करने की क्षमता रखता है। धर्म मानवीय दृष्टि... करने की क्षमता रखता है। धर्म मानवीय दृष्टि को व्यापक बनाता है। धर्म मानव मन में उदारता, सहिष्णुता एवं प्रेम की भावना का विकास करता है। समाज की व्यवस्था,...
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निर्वाण क्या है? ...
का शांत हो जाना। तृष्णा और वासना से ही दुःख होता है। दुःखों से पूरी तरह छुटकारे का नाम है- निर्वाण। भगवान बुद्ध ने कहा है- 'भिक्षुओं! संसार अनादि है। अविद्या और तृष्णा से संचालित होकर प्राणी भटकते फि...
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शंकराचार्य को जानें ...
शंकराचार्य ने हिंदू धर्म को व्यवस्थित करने का भरपूर प्रयास किया। उन्होंने हिंदुओं की सभी जातियों को इकट्ठा करके 'दसनामी संप्रदाय' बनाया और साधु समाज की... का निर्माण कर वैदिक धर्म एवं दर्शन को पुन: प्रतिष्ठित करने के लिए अनेक श्रमण, बौद्ध तथा हिंदू विद्वानों से शास्त्रार्थ कर उन्हें पराजित किया।...
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हिन्दू और जैन धर्म को जानें ...
मन से निकाल दें कि जैन धर्म हिन्दू धर्म की एक शाखा है। जैन धर्म से प्राचीन है हिन्दू धर्म, यह कहना भी गलत है। ठीक इसके विपरीत भी नहीं। कोई इस बात पर बहस... क्या परिणाम होगा। दोनों धर्म के शुरुआती दौर में न तो जैन शब्द था और न ही हिन्दू। ब्राह्मण और श्रमण शब्द जरूर प्रचलन में था। हाँ, जिन शब्द भी था लेकिन...
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शंकराचार्य को जानें ...
कठिन योग साधना और धर्मप्रचार में ही उनका सारा जीवन बितता है। दसनामी संप्रदाय में शैव और वैष्णव दोनों ही तरह के साधु होते हैं। यह दस संप्रदाय निम्न हैं... दुनिया के तमाम तरह का धर्म, विज्ञान और दर्शन निकलता है।...
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लग्न में सूर्य हो तो ...
को आगे बढ़ाते हुए हम पढ़ेंगे कि यदि लग्न भाव में सूर्य बैठा हो तो वह जातक को क्या परिणाम देगा। * लग्न का सूर्य जातक को क्रोधी बनाता है। ये व्यक्ति लंबे कद के, वाक-पटु, विवादी व विद्वान होते हैं, अहंक...
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