धौती कर्म के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
जानें धौती कर्म को ...
जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त होता सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। इस बार जानें धौती...
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कपालभाती प्राणायाम ...
कपालभाती प्राणायाम को हठयोग के षट्कर्म क्रियाओं के अंतर्गत लिया गया है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। इस बार जानें धौती कर्म को।...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/yoga/article/0907/16/1090716055_1.htm - 2252.00kb
'धौती कर्म' आहे तरी काय? ...
शरीर तंदरूस्त रहाण्यासाठी व शुध्द करण्‍यासाठी प्राणायामाकडे कल वाढलेला दिसतो. परंतु, जोपर्यंत शरीर शुध्द होत नाही, तोपर्यंत आसन व प्राणायामाचा लाभ घेता येत नाही. शरीर शुध्द करण्‍यासाठी धौती कर्म केले...
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षट्‍कर्म अथवा शुद्धिकारक क्रियाएँ ...
जाती हैं। जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त हो सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती.... नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। शरीर जीवात्मा का घर है। प्राणों की क्रियाएँ संतुलित और समतापूर्ण हो इसके लिए इसकी यदा-कदा सफाई करते रहने...
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सुधारे कर्म चक्र को ...
योग: कर्मसु कौशलम्। यानी कर्म की कुशलता ही योग है। कर्म की कुशलता के लिए जितने उपाय हैं, वे सब इसमें शामिल हैं। अर्जुन ने कहा, 'हे जनार्दन! जब आप कर्मों... कहा, 'हे जनार्दन! जब आप कर्मों की अपेक्षा ज्ञान को श्रेष्ठ तथा मान्य बताते हैं तो फिर मुझे कर्म करने के लिए क्यों कह रहे हैं? आपकी बातें मेरी बुद्धि को...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/yoga/article/0806/14/1080614112_1.htm - 5168.00kb
बस्ती और नौली क्रिया ...
जाती हैं। जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त होता सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती.... नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। इस बार जानें बस्ती और नौली क्रिया को। बस्ती क्रिया : यह गुदा की सफाई के लिए प्रयु‍क्त किया जाता है। साधक...
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कर्म और अकर्म क्या है? ...
के सत्संग-प्रवचन से) कर्म करते-करते हम भगवत प्राप्ति कैसे कर सकते हैं? इस संबंध में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।... कहते हैं- किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः। तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्‌॥ (गीता - 4.16) 'कर्म क्या है और अकर्म क्या है?...
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कर्म ॥ ...
तहा मोहं, आउकम्मं तहेव य॥ नामकम्मं च गोयं च, अंतरायं तहेव य। एवमेयाइं, कम्माइं, अट्ठेव उ समासओ॥ महावीर स्वामी ने कर्मों की संख्या आठ बताई है। ये कर्म हैं- 1. ज्ञानावरणीय कर्म- वह कर्म, जिससे आत्मा के...
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योग से पाएँ सिद्धियाँ ...
और दृष्टा का भेद दिखाई देने लगता है। ऐसा योगी संपूर्ण भावों का स्वामी तथा सभी विषयों का ज्ञाता हो जाता है। 14. उदान शक्ति : उदानवायु के जीतने पर योगी को जल, कीचड़ और कंकड़ तथा काँटे आदि पदार्थों का स...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/yoga/article/0905/13/1090513058_2.htm - 6448.00kb
Religion to unite the Humanities ...
आलेख श्रीकृष्ण का कर्म संदेश हे धनंजय! कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, उसके फलों में नहीं। तुम कर्मफल का कारण भी मत बनो। कर्म न करने में भी तुम्हारी... का कारण भी मत बनो। कर्म न करने में भी तुम्हारी आसक्ति नहीं होनी चाहिए। तुम योगस्थ होकर कर्म करो, क्योंकि सिद्धिअसिद्धि, हर्षविषाद में समभाव से रहना ही...
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