नेती के लिए खोज परिणाम ( 1-9 )
त्राटक और नेती क्रिया ...
हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। सर्वप्रथम जानें त्राटक और नेती के बारे में... जानें त्राटक और नेती के बारे में...
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आयुर्वेद एवं जलनेती ...
1. धैती, 2. बस्ति, 3. नेती, 4. त्राटक, 5. नौलिक, 6. कपालभाति नामक षट्शोधन कर्म का वर्णन किया गया है। घेरण्ड संहिता में नौलि के स्थान पर नौलिक शब्द का... मुख द्वारा बाहर निकालना नेती कर्म कहलाता है। घेरण्ड संहिता के अनुसार नेतीकर्म से सिद्धि प्राप्त होती है। कफ दोष का नाश होता है तथा दिव्य दृष्टि की प्राप्ति...
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कपालभाती प्राणायाम ...
कपालभाती प्राणायाम को हठयोग के षट्कर्म क्रियाओं के अंतर्गत लिया गया है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। इस बार जानें धौती कर्म को।...
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योग में 'पवित्रता' का महत्व ...
संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्राणिधान ये पाँच नियम है। शौच को अंग्रेजी में Purity कह सकते हैं। अष्टांग योग के दूसरे अंग 'नियम' के उपांगों के अंतर्गत प्रथम 'शौच' का जीवन में बहुत महत्व है। शौच अर्था...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/yoga/article/0910/07/1091007099_1.htm - 4218.00kb
बस्ती और नौली क्रिया ...
...शरीर को स्वस्थ्य और शुद्ध करने के लिए छ: क्रियाएँ विशेष रूप से की जाती हैं। जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त होता सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। इस बार जानें बस्ती और नौली क्रिया को।...
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षट्‍कर्म अथवा शुद्धिकारक क्रियाएँ ...
जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त हो सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। शरीर जीवात्मा का घर...
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जानें धौती कर्म को ...
जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त होता सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। इस बार जानें धौती...
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योग से पाएँ सिद्धियाँ ...
और दृष्टा का भेद दिखाई देने लगता है। ऐसा योगी संपूर्ण भावों का स्वामी तथा सभी विषयों का ज्ञाता हो जाता है। 14. उदान शक्ति : उदानवायु के जीतने पर योगी को जल, कीचड़ और कंकड़ तथा काँटे आदि पदार्थों का स...
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आजचा 'पॉवर योगा', कालचा 'हठयोग' ...
म्हणजे 'हट्टाने केलेला योग' असे म्हटले तर वावगे ठरणार नाही. समाधीवस्था प्राप्त करण्यासाठी हठयोग हा शेवटचा पर्याय मानला जातो. समाधीवस्थेसाठी शरीराला एवढा त्रास द्यावा की तो त्रासही एक अवस्था बनावी आणि...
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