पोयम के लिए खोज परिणाम ( 1-4 )
ध्यानमग्न झील ...
निर्भय गहाराई बीच में किनारे बतला सकते थाह तन की डुबकी का आनंद नहीं उसमें पर समीप होने का छू लेने का उत्साह ध्यानमग्न साध्वी के निकट बैठ लेने की चाह। श्वास मंद उपवास मौनव्रत भी कठोरतम नख से शिख न क्र...
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दूर के ढोल ...
तो भईया हम बहुत-बहुत पछतावे हैं जब तक अपने देश रहे थे विदेस के सपने सजाए थे जब हिन्दी बोले की बारी थी अँग्रेजी बहुत गिटपिटाए थे कोई खीर जलेबी इमरती परोसे तब पीजा हम फरमाए थे वहाँ टीका, सेन्दूर, साड़ी...
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नि:शब्द प्रेम प्रतिज्ञा ...
और वो वर्षों का एकाकीपन है तेरी लाज के आँचल पर अब तक ठिठका मेरा मन है। सिमटे सकुचे ‍तुम बैठे थे जैसे उस पहली अपनी मुलाकात में अब भी वैसे ही मिलते हो मुझको हर भीगी सीली श्यामल रात में। अपनी मृग-चंचल आ...
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चीरता प्रकाश तुम ...
तुम मेरे मन की कल्पनाएँ चाहें तुम्हें तराशना हाथ की लकीरों-सा चाहें तुम्हें उकेरना सोचती लूँ तुम्हें कौन-सा आकार दूँ जिसमें हो संपूर्णता कम से कम विकार दूँ हे अंनत आकाश के रचयिता कहो किस रूप में तुम्...
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