प्रवासी कविता के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
चीरता प्रकाश तुम ...
तुम मेरे मन की कल्पनाएँ चाहें तुम्हें तराशना हाथ की लकीरों-सा चाहें तुम्हें उकेरना सोचती लूँ तुम्हें कौन-सा आकार दूँ जिसमें हो संपूर्णता कम से कम विकार दूँ हे अंनत आकाश के रचयिता कहो किस रूप में तुम्...
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पलाश और अमलताश ...
करोगे? कब अपने सिंदूरी रंग से सूनी मेरी मांग भरोगे? बोला पलाश, मत हो उदास मैं यहीं हूँ तेरे आस-पास बस चलने दे फागुनी बयार और सज जाने दे अमलताश तब अपने मखमली लवों से मैं तेरा श्रृंगार करूँगा तब अपने स...
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शहनाज : एक और दो ...
थी उतरा था जिस पे बाबे-हया1 का वर्क2-वर्क बिस्तर की एक-एक शिकन की शरीक थी मैं एक एतिबार से आतिश-परस्त3 था वह सारे जावियाँ4 से चमन की शरीक थी। वह नाजिशे-सितारा-ओ-तन्नाज माहताब5 गर्दिश के वक्त मेरे गहन...
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बाबूजी ...
से सावन की पड़ती फुहार से नरम-गरम बाबूजी दरवाजे पर लटके ताले से आँगन में लगे जाल से सुरक्षा की मजबूत कड़ी बाबूजी गीतों में लोक गीत से सदियों से चली आ रह‍ी रीत से कभी न बदले बाबूजी परीक्षा के प्रश्न-प...
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जीवन का आँचल ...
मेरे जीवन का आँचल मैं बन भिक्षुणी स्नेहांजलि लिए दिन भर भटकती ही रही पा सकी न प्रेम-भिक्षा झोली मेरी खाली ह‍ी रह‍ी गेरुएपन की आड़ में रक्त-ह्रदय का छिपात‍ी ही रही थोड़ा कुछ पा जाने की आस में सर्वस्व ...
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एक गाँव ...
ये कहाँ आ गयी हूँ मैं? जहाज घूम रहा है कि द्वीप के आस-पास बसे घर गाँव पेड़-पौधे घूम रहे हैं! ये चर्खी-सा घुमाते जाते हैं और मैं घूमती जाती हूँ लगता है जहाज रुका खड़ा है ये नजारे घूमंत फिल्मों से घूम रहे हैं आस-पास!...
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Welcome to Webdunia Hindi ...
परमजीत ओबराय 4 दिसंबर 1966 को जन्म। दिल्ली यूनिवर्सिटी से एम.ए. और पी.एच-डी.। 16 सालों तक विभिन्न स्कूलों में अध्यापन के बाद बहरीन में पढ़ाती हैं । GN वर्षा के दिन देख सहसा कुछ कीट पतंगे मन हो जाता ह...
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आँसू ...
गूँथों छंद अधरों में सजाओ कल्पना में डूब सुख की कर्म की वीणा बजाओ विषाद के दलदल में फँसकर प्राण देना उचित नहीं खोजिए पीयूष धारा आँसुओं का स्वाद खारा जंग लगने दीजिए मत योग्यता के शस्त्र में गंदनी लगने...
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कौन शख्स था वह? ...
गया कौन शख्स था वह। अभी वह बस्ती बसी हुई है बहुत-से लोगों को याद होगा हमारी चाहत से रूप जिसका निखर गया कौन शख्स था वह। सुना तो हमने सड़क के उस पार फिर कोई हादसा हुआ है कहा तो सबने कि एक राहगीर मर गया...
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प्रवासी कविता : छिट पुट ...
में जन्म। पंजाब विश्वविद्यालय से एम.ए., पी.एच.डी.। कुछ समय तक सरकारी कॉलेज लुधियाना में प्राध्यापिका रहीं। 1982 में अमेरिका आईं और अब ओहायो में रहती हैं। हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए श्रेष्ठ नाटकों...
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