प्रियंका पांडेय पाडलीकर के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
घातक है कंप्यूटर से दोस्ती ...
बल्कि कस्बों और गाँवों में भी हमारी जीवनशैली का अहम हिस्सा हो चुका है। आज की जरूरतों को ध्यान में रखकर इससे दूरी बना पाना नामुमकिन-सा हो गया है। एक ओर यह हमारे समय और मेहनत, दोनों की बचत का आसान जरिय...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/health/healthnews/0906/03/1090603096_... - 2128.00kb
कहाँ है भविष्य? ...
नया सत्र लगभग शुरू होने की कगार पर है, वहीं दूसरी ओर इन विश्वविद्यालयों में दाखिला न ले पाने वाले छात्रों के लिए संशय की अजीबोगरीब स्थिति है। इस स्थिति में दिनोंदिन खुल रहे निजी संस्थान छात्रों के वि...
hindi.webdunia.com/news/career/articles/0907/06/1090706050_1.htm - 5010.00kb
देह पर चढ़ता नया रंग ...
इन सबको बेहतर अभिव्यक्ति देने का एक खूबसूरत जरिया है बॉडी पेंटिंग। यह पारंपरिक कला शैली से ऊपर उठकर आज फैशनपरस्तों के बीच बेहद आम है। बॉडी पेंटिंग यानी विभिन्न प्रकार के रंगों या मेहंदी के प्रयोग से ...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/woman/fashion/0909/02/1090902071_1.ht... - 5584.00kb
तीसरी जेनेरेशन की 3जी टेक्नोलॉजी (तीसरी जेनेरेशन 3जी ...
पांडेय पाडलीकर PR PR हाल ही में भारतीय मोबाइल बाजार में 3जी तकनीकी वाले ऐप्पल आईफोन के उतरने से मोबाइल के शौकीनों के बीच खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। भारतीय बाजार में इस फोन ने जहाँ एक ओर धूम मचा रखी है...
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Treasure of Literature ...
सावन की पहली फुहार - प्रियंका पांडेय ND ND मुँदे से कोंपल-मन पर जब पड़ी प्रेम की बूँद, पुलकित हुआ मन बनकर युवा पुष्प छूने को नया आकाश उठाता सिर बार-बार... पहली फुहार - प्रियंका पांडेय ND ND मुँदे से कोंपल-मन पर जब पड़ी प्रेम की बूँद, पुलकित हुआ मन बनकर युवा पुष्प छूने को नया आकाश उठाता सिर बार-बार जब ली...
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Treasure of Literature ...
मैं धरा तुम हो गगन - प्रियंका पांडेय ND ND सावन की पहली फुहार से कृपार्थ हो गया तन-मन, रिमझिमाती जब बूँद बन बरसे जो तुम गगन मैं धरा तुम बिन अबली, जीती... तुम हो गगन - प्रियंका पांडेय ND ND सावन की पहली फुहार से कृपार्थ हो गया तन-मन, रिमझिमाती जब बूँद बन बरसे जो तुम गगन मैं धरा तुम बिन अबली, जीती सकुचाती-...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/poems/0707/30/1070730016_1... - 34.41kb
Treasure of Literature ...
याद आ जाते हो अक्सर - प्रियंका पांडेय ND ND याद आ जाते हो अक्सर छत की मुंडेर पर बैठी देखती हूँ जब बारिश की बूँदों में छपछपाते तुम याद आ जाते हो अक्सर मेरे... हो अक्सर - प्रियंका पांडेय ND ND याद आ जाते हो अक्सर छत की मुंडेर पर बैठी देखती हूँ जब बारिश की बूँदों में छपछपाते तुम याद आ जाते हो अक्सर मेरे इठलाते...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/poems/0707/30/1070730017_1... - 36.53kb
Treasure of Literature ...
भीड़ में कुछ तनहा हूँ प्रियंका पांडेय ND भीड़ में कुछ तनहा सी अपलक कुछ देखती हूँ रेत को मुठ्ठी में भर थामें रखने की चेष्टा कर अपने एकाकीपन में तुम्हें... कुछ तनहा हूँ प्रियंका पांडेय ND भीड़ में कुछ तनहा सी अपलक कुछ देखती हूँ रेत को मुठ्ठी में भर थामें रखने की चेष्टा कर अपने एकाकीपन में तुम्हें सहेज कर...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/poems/0805/13/1080513017_1... - 25.96kb
नया साल ...
प्रियंका पांडेय नई है आशा नया सवेरा नया-नया उल्लास नए साल की नई बात है नया है प्रातः काल नए हैं मन के कोमल भाव नया पुष्प है नया पल्लवन नया लगे संसार नया गगन है नई चाह है नए-नए अरमान नए साल पर नए हैं सपने और नया संसार।...
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प्रेम का प्रकाश ...
को प्रेममयी प्रकाश उठते हैं बार-बार फिर भी तुम जल-प्रपात गिरते हो निराधार उन सारे भावों को गति में विलीन कर बनना चाहते हो अथाह पर मत भूलो सारा आकाश तुम्हारा है, यह प्रेम का प्रकाश तुम्हारा है कोमल भा...
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