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लोपामुद्रा : रसमय उपन्यास ...
ने तीन खंडों में वैदिककालीन संस्कृति के धुंधले के इतिहास को सुस्पष्ट करने का प्रयास किया है। उपन्यास लोपामुद्रा -'आर्यावर्त की महागाथा' का पहला खंड है। इसमें वैदिक सभ्यता और संस्कृति का बहुत ही सुंदर...
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हमारे समय में श्रम की गरिमा ...
रह गई है। श्रमजीवी वर्ग इसीलिए हाड़तोड़ परिश्रम करने के बाद भी कम पारिश्रमिक पाने और अभावग्रस्त जीवन जीने को अभिशप्त हैं। ऐसे में कांचा आइलैया की लिखी किताब 'कुम्हार, धोबी, बुनकर , मोची : हमारे समय में...
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कतरा-कतरा रोशनी ...
को ज्यादा मर्मस्पर्शी तरीके से और संक्षिप्त रूप से कह जाती हैं। फिर अक्सर कविताएँ दिल की बात को जबान देने का काम करती हैं। जो भी आप सोचते रहते हैं और जो भी बात आपके मन को छू लेती है उसे आपका हृदय लयब...
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इक्कीसवीं सदी की ओर ...
स्थिति में काफी सुधार हुआ है। बहुत थोड़े पैमाने पर ही सही लेकिन इक्कीसवीं सदी की स्त्री-छबि बड़ी तेजी से आकार ग्रहण कर रही है। और हम उम्मीद कर सकते हैं कि नई सदी में वह भारतीय समाज की एक समर्थ और स्व...
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छत्तीसगढ़ की सुरम्य झाँकी ...
संस्कृति। लेखिका शंकुतला तरार ने इस प्रदेश के आदिवासी अंचलों को बहुत करीब से जाना है। तभी तो वे इतनी अच्छी तरह से उसे कागज पर उतार पाईं हैं। शकुंतलाजी की हाल ही प्रकाशित तीन रचनाएँ छत्तीसगढ़ की ही कहा...
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नंदीग्राम डायरी : आत्मश्लाघा का नमूना ...
की छवि को बहुत नुकसान पहुँचाया है। पत्रकार पुष्पराज के अनुसार उन्होंने नंदीग्राम में इस दौरान भूमिगत पत्रकारिता की और 'नंदीग्राम की यात्रा से लौटकर' यात्रा के एक-एक पल को डायरी में दर्ज किया। हालाँकि...
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क्या चीन हमारा दोस्त है? ...
तरफ चीन की अद्भुत आर्थिक प्रगति लेकर लोग हैरत में नजर आते हैं, तो दूसरी तरफ दुश्मनी का पुराना भाव जब-तब उभरता रहता है। तेज आर्थिक विकास के पैरोकार चीन से सबक लेने की सलाह देते हैं, तो चीन के हर कदम क...
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मानव का 'प्रकृतिघात' ...
के प्रति संवेदना जगाने का एक अच्छा, रोचक और सराहनीय प्रयास उन्होंने किया है। इस कहानी संग्रह के माध्यम से पशु-पक्षियों के जीवन का कठोर सच हमारे सामने आता है। भौतिकता में हर बात को विस्मृत करते मानव क...
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धर्म का सच और सच का धर्म ...
जिन पर अनंत तक वाद-विवाद किया जा सकता है। जो लोग धर्म या ईश्वर में आस्था नहीं रखते उनके अपने तर्क हैं और जो लोग ईश्वर को मानते हैं उनके अपने। इस सबके बावजूद असल में धर्म का स्वरूप क्या है तथा उसे जीव...
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महादेवी : अंतरंग संसार में झाँकने की कोशिश ...
में इन सभी प्रविधियों का कुशलता पूर्वक इस्तेमाल किया है। कवि-कथाकार तो वे हैं ही। इसीलिए उनकी अपनी 'खुसफैल शैली' में लिखी गई इस किताब में एक औपन्यासिक काव्यात्मकता ओर-छोर नजर आती है। यह किताब महादेवी...
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