भावार्थ के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
Ramcharitmanas ...
शांति हो सकती है?॥78॥ भावार्थ:- चौपाई : * चलेउ निसाचर कटकु अपारा। चतुरंगिनी अनी बहु धारा॥ बिबिधि भाँति बाहन रथ जाना। बिपुल बरन पताक ध्वज नाना॥1॥ राक्षसों... और ध्वजाएँ हैं॥1॥ भावार्थ:- * चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे॥ बरन बरन बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया॥2॥ मतवाले हाथियों के...
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अयोध्या काण्ड | अयोध्याकाण्ड | प्रभु राम | Shri Ram ...
दें, स्वीकार कीजिए॥212॥ भावार्थ:- चौपाई : * सुनि मुनि बचन भरत हियँ सोचू। भयउ कुअवसर कठिन सँकोचू॥ जानि गुरुइ गुर गिरा बहोरी। चरन बंदि बोले कर जोरी॥1॥ मुनि... करके हाथ जोड़कर बोले-॥1॥ भावार्थ:- * सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरम यहु नाथ हमारा॥ भरत बचन मुनिबर मन भाए। सुचि सेवक सिष निकट बोलाए॥2॥ हे नाथ! आपकी...
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उत्तरकाण्ड | भरत मिलाप | रामायण | राम | सीता | Uttarkand ...
सब कथा सुनावउँ तोही॥1॥ भावार्थ:- हे पक्षीराज गरुड़जी! श्री रघुनाथजी की प्रभुता सुनिए। मैं अपनी बुद्धि के अनुसार वह सुहावनी कथा कहता हूँ। हे प्रभो! मुझे... रहस्य मनोहर गावउँ॥2॥ भावार्थ:- हे तात! आप श्री रामजी के कृपा पात्र हैं। श्री हरि के गुणों में आपकी प्रीति है, इसीलिए आप मुझे सुख देने वाले हैं। इसी से...
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बालकाण्ड | प्रभु राम | रामायण | Shri Ram Katha ...
आचार हो वैसा करो॥286॥ भावार्थ:- चौपाई : * दूत अवधपुर पठवहु जाई। आनहिं नृप दसरथहिं बोलाई॥ मुदित राउ कहि भलेहिं कृपाला। पठए दूत बोलि तेहि काला॥1॥ जाकर अयोध्या... को बुलाकर भेज दिया॥1॥ भावार्थ:- * बहुरि महाजन सकल बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिर नाए॥ हाट बाट मंदिर सुरबासा। नगरु सँवारहु चारिहुँ पासा॥2॥ फिर सब महाजनों को...
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बालकाण्ड | प्रभु राम | रामायण | Shri Ram Katha ...
कंकन ताल गति बर बाजहीं॥ भावार्थ:- सुंदर मंगल का साज सजकर (रनिवास की) स्त्रियाँ और सखियाँ आदर सहित सीताजी को लिवा चलीं। सभी सुंदरियाँ सोलहों श्रृंगार किए... सुषमा तिय कमनीय॥322॥ भावार्थ:- सहज ही सुंदरी सीताजी स्त्रियों के समूह में इस प्रकार शोभा पा रही हैं, मानो छबि रूपी ललनाओं के समूह के बीच साक्षात परम मनोहर...
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बालकाण्ड | प्रभु राम | रामायण | Shri Ram Katha ...
जनमीं पारबती तनु पाई॥3॥ भावार्थ:- सती ने मरते समय भगवान हरि से यह वर माँगा कि मेरा जन्म-जन्म में शिवजी के चरणों में अनुराग रहे। इसी कारण उन्होंने हिमाचल... बास हिम भूधर दीन्हे॥4॥ भावार्थ:- जब से उमाजी हिमाचल के घर जन्मीं, तबसे वहाँ सारी सिद्धियाँ और सम्पत्तियाँ छा गईं। मुनियों ने जहाँ-तहाँ सुंदर आश्रम बना...
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Ramcharitmanas ...
को युवराज पद दे दें॥1॥ भावार्थ:- चौपाई : * एक समय सब सहित समाजा। राजसभाँ रघुराजु बिराजा॥ सकल सुकृत मूरति नरनाहू। राम सुजसु सुनि अतिहि उछाहू॥1॥ एक समय... आनंद हो रहा है॥1॥ भावार्थ:- * नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें॥वन तीनि काल जग माहीं। भूरिभाग दसरथ सम नाहीं॥2॥ सब राजा उनकी कृपा...
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उत्तरकाण्ड | भरत मिलाप | रामायण | राम | सीता | Uttarkand ...
वर्णन नहीं कर सकते॥1॥ भावार्थ:- * राम अनंत अनंत गुनानी। जन्म कर्म अनंत नामानी॥ जल सीकर महि रज गनि जाहीं। रघुपति चरित न बरनि सिराहीं॥2॥ भगवान्‌ श्री राम... करने से नहीं चूकते॥2॥ भावार्थ:- * बिमल कथा हरि पद दायनी। भगति होइ सुनि अनपायनी॥ उमा कहिउँ सब कथा सुहाई। जो भुसुंडि खगपतिहि सुनाई॥3॥ यह पवित्र कथा भगवान्‌...
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अयोध्या काण्ड | अयोध्याकाण्ड | प्रभु राम | Shri Ram ...
तहँ पावन अमिअ अनूप॥309॥ भावार्थ:- तब अत्रिजी ने भरतजी से कहा- इस पर्वत के समीप ही एक सुंदर कुआँ है। इस पवित्र, अनुपम और अमृत जैसे तीर्थजल को उसी में स्थापित... गए जहँ कूप अगाधू॥1॥ भावार्थ:- भरतजी ने अत्रिमुनि की आज्ञा पाकर जल के सब पात्र रवाना कर दिए और छोटे भाई शत्रुघ्न, अत्रि मुनि तथा अन्य साधु-संतों सहित आप...
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बालकाण्ड | प्रभु राम | रामायण | Shri Ram Katha ...
रघुपति गुन ग्रामा॥2॥ भावार्थ:- मैं उन सब (श्रेष्ठ कवियों) के चरणकमलों में प्रणाम करता हूँ, वे मेरे सब मनोरथों को पूरा करें। कलियुग के भी उन कवियों को... सबहि कपट सब त्यागें॥3॥ भावार्थ:- जो बड़े बुद्धिमान प्राकृत कवि हैं, जिन्होंने भाषा में हरि चरित्रों का वर्णन किया है, जो ऐसे कवि पहले हो चुके हैं, जो...
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