रचना कर्म के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
साहित्य में सहकारिता ...
किया जाता है। सिवाय रचना कर्म के। मगर सच्चा साहित्यकार रचना कर्म करता ही कितना है। साहित्यिक जीवन के प्रारंभिक जीवन में जितनी रचना लिखनी होती है, लिख... मगर सच्चा साहित्यकार रचना कर्म करता ही कितना है। साहित्यिक जीवन के प्रारंभिक जीवन में जितनी रचना लिखनी होती है, लिख लेता है, बाकी का लंबा जीवन तो सहकारिता...
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साहित्य में सहकारिता ...
है। जुबानी बमबारी में रचना चोरी करने तक के आरोप-प्रत्यारोप पीठ पीछे तक लगते हैं। मैं चला था जानिबे मंजिल अकेला ही मगर, लोग मिलते गए, कारवाँ बनता गया की... होती हैं जिनमें रचनापाठ होता है। इस दौर में सहकारिता की भूमिका एक-दूसरे की रचनाओं की तारीफ तथा परस्पर सहयोग से चाय-पानी और प्रेस नोट लिखना, टाइप करवाना,...
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Treasure of Literature ...
की उपलब्धियों और रचनात्‍मकता का कुल जमा जोड़ निकाला जाए त ो नि:संदेह एक तरफ समूची साहित्‍य बिरादरी और उसका लेखन होगा और दूसरी तरफ कफन और ईदगाह से लेकर... ईदगाह से लेकर गोदान और कर्मभूमि तक कई हजार पृष्‍ठों में फैली उस कृशकाय लेखक की कल म, जिसे हम प्रेमचंद के नाम से जानते हैं। वह अकेली कलम समूचे हिंदी साहित्‍य...
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सुधारे कर्म चक्र को ...
योग: कर्मसु कौशलम्। यानी कर्म की कुशलता ही योग है। कर्म की कुशलता के लिए जितने उपाय हैं, वे सब इसमें शामिल हैं। अर्जुन ने कहा, 'हे जनार्दन! जब आप कर्मों... कहा, 'हे जनार्दन! जब आप कर्मों की अपेक्षा ज्ञान को श्रेष्ठ तथा मान्य बताते हैं तो फिर मुझे कर्म करने के लिए क्यों कह रहे हैं? आपकी बातें मेरी बुद्धि को...
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प्रेम जन्मेयज को 'व्यंगश्री 2009' सम्मान ...
हो जाती है। व्यंगकार का कर्म मनोरंजन करना कतई नहीं है, उसका कर्म तो ऐसी रचना का सृजन करना है जो सोचने को बाध्य करें। प्रेम जन्मेजय अपनी रचनाओं के माध्यम... प्रेम जन्मेजय अपनी रचनाओं के माध्यम से व्यंग्य की इसी भूमिका का निर्वाहन कर रहे हैं।' उक्त उद्‍गार प्रख्यात आलोचिका डॉ. निर्मला जैन ने, प्रतिष्‍ठित व्यंगकार...
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कर्म और अकर्म क्या है? ...
के सत्संग-प्रवचन से) कर्म करते-करते हम भगवत प्राप्ति कैसे कर सकते हैं? इस संबंध में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।... कहते हैं- किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः। तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्‌॥ (गीता - 4.16) 'कर्म क्या है और अकर्म क्या है?...
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कर्म ॥ ...
तहा मोहं, आउकम्मं तहेव य॥ नामकम्मं च गोयं च, अंतरायं तहेव य। एवमेयाइं, कम्माइं, अट्ठेव उ समासओ॥ महावीर स्वामी ने कर्मों की संख्या आठ बताई है। ये कर्म हैं- 1. ज्ञानावरणीय कर्म- वह कर्म, जिससे आत्मा के...
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Religion to unite the Humanities ...
आलेख श्रीकृष्ण का कर्म संदेश हे धनंजय! कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, उसके फलों में नहीं। तुम कर्मफल का कारण भी मत बनो। कर्म न करने में भी तुम्हारी... का कारण भी मत बनो। कर्म न करने में भी तुम्हारी आसक्ति नहीं होनी चाहिए। तुम योगस्थ होकर कर्म करो, क्योंकि सिद्धिअसिद्धि, हर्षविषाद में समभाव से रहना ही...
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तांत्रिक साधना के प्रकार ...
तथा। गोरणों तनिसति षट कर्माणि मणोषणः॥ शान्ति कर्म वशीकरण स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन, मारण इन छ: प्रयोगों को तांत्रिक षट् कर्म कहते हैं। मारण मोहनं स्तम्भनं... होती है, उसको शान्ति कर्म कहा जाता है और जिस कर्म से सब प्राणियों को वश में किया जाए, उसको वशीकरण प्रयोग कहते हैं तथा जिससे प्राणियों की प्रवृत्ति रोक...
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कर्मों में कुशलता है योग-कृष्ण ...
युज्यस्व योग: कर्मसु कौशलम्'-गी. 2-50 अर्थात इससे समत्वबुद्धि योग के लिए ही चेष्टा करो, यह समत्वबुद्धि-रूप योग ही कर्मों में चतुरता है। अर्थात कर्मो में... में चतुरता है। अर्थात कर्मो में कुशलता को ही योग कहते है। सुकर्म, अकर्म और विकर्म- तीन तरह के कर्मों की योग और गीता में विवेचना की गई है। कर्म : सुकर्म...
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