रोहित जैन के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
हम कभी जिए ही नहीं ... ...
कौन कहता है कि मौत आएगी तो मर जाएँगे उन्हें बताए कोई हम कभी जिए ही नहीं। - रोहित जैन...
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दो फूल तेरी ज़ुल्फ़ में मैं भी सजा सकूँ ...
सकूँ कैसा तेरा जादू है के तेरे विसाल में नज़दीक आ सकूँ न ही मैं दूर जा सकूँ पलकें झुका के कैसा अजब कर लिया पर्दा ना देख सकूँ पार ना इसको उठा सकूँ ये नहीं कहता हूँ के लौट आए गया वक़्त इतना ही बहुत है के...
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जिस शख़्स से उम्मीद थी फूलों की ...
जिस शख़्स से उम्मीद थी फूलों की, वही, राहों में मेरी खार बिछा के चला गया। सपनों का इक जहान बसाया था जिसके साथ, दुनिया वही ग़मों की बसा के चला गया, शम्मा जलाई जिसके इंतज़ार में वही, शम्मा से मेरा घर ज...
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प्यार को प्यार कहूँ ... ...
मेरी आँखों में इन्हें मैं ख्वाब कहूँ, धूल कहूँ प्यार ने ग़म दिए रुसवाइयाँ दीं प्यार को प्यार कहूँ, भूल कहूँ कोई शय ऐसी भी हो मेरे मौला मैं जिसको वाक़ई क़बूल कहूँ इनकी वजह से खो दिया सब कुछ जिन्हें मैं आ...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/poems/0906/01/1090601108_1... - 918.00kb
तुझको दिन-रात याद करते हैं ...
नहीं पाते लेके बरसात याद करते हैं तेरे मिलने की दुआ है हर पल जोड़कर हाथ याद करते हैं दुश्मनी नींद से हुई अपनी तुझको हर रात याद करते हैं मेरे काँधे पे जब तेरा सर था वो मुलाक़ात याद करते हैं, उसी इख़लासो ...
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चार बूँद गिरी हैं ज़मीन पर ...
तक मुग़ालते में रहूँ नाख़ुदा के मैं साहिल को मौज, मौज को साहिल बनाइए ये इम्तिहाँ भी देखिए मैंने किया है पार कुछ और मेरी ज़ीस्त को मुश्किल बनाइए ये बर्क़ मेरे घर को जला ही नहीं सकी इसकी तपिश को मेरे मुक़ाब...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/poems/0907/03/1090703051_1... - 1116.00kb
बिखर गया हूँ फ़साने की तरह ...
की तरह मुझे कुछ इस तरह से ढ़ूँढ़ रही है गर्दिश के जैसे मै हूँ शिकारी के निशाने की तरह के रात रात न हो, कोई चिता हो जैसे के जैसे ख़्वाब हों जलने के बहाने की तरह मै कोई संग न था मै तो एक शीशा था पटक दिया ...
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हो मेरी भी क़िस्मत के तेरे काम आ सकूँ ...
सकूँ लाखों का खून वतन की मिट्टी में लगा है मेरा भी हो नसीब दो क़तरे गिरा सकूँ जिन दीमकों ने खोखली कर दी तेरी बुनियाद हो मुझ में वो हुनर के मैं उनको मिटा सकूँ तेरे सभी बच्चे जो हैं मुफ़लिस-ओ-ग़मज़दाँ इतना...
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जब भी मुझको तेरी यादों ने बुलाया ...
इसको अदा कहूँ के ये एहसान है तेरा तर्क़े वफ़ा के बाद भी सलाम आ गया अब कम से कम उसको मेरे मिलने का डर नहीं मर के ही सही मैं किसी के काम आ गया सोचा था सुबह, अब नहीं जाना है उसकी ओर लो फिर से वहीं लेके अप...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/poems/0906/02/1090602067_1... - 998.00kb
जब तेरी याद मुझको आती है ...
नाम से अब सारी दुनिया मुझे सताती है दिल पे रहता नहीं मेरा काबू जब तेरी याद मुझको आती है तू जहाँ देख ले नज़र भर के वहाँ किस्मत भी मुस्कुराती है खोई खोई सी तेरी आँखों में ज़िंदगी झूम झूम जाती है याद आ आ ...
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