स्वामी ज्योतिर्मयानंद के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
मुद्रा का महत्व ...
- स्वामी ज्योतिर्मयानंद की पुस्तक से अंश मुद्रा का शाब्दिक अर्थ है मुहर। चूँकि यह मन को आत्मा के साथ जोड़कर मुहरबंद कर देता है, इसलिए इस अभ्यास को मुद्रा... and Happiness) लेखक : स्वामी ज्योतिर्मयानंद हिंदी अनुवाद : योगिरत्न डॉ. शशिभूषण मिश्र प्रकाशक : इंटरनेशनल योग सोसायटी...
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प्राणायाम का प्रभाव ...
- स्वामी ज्योतिर्मयानंद की पुस्तक से अंश कपालभाती और भस्त्रिका प्राणायाम में जिस प्रकार तेजी से सांस लिया और छोड़ा जाता है उससे रक्त, उत्तकों और कोशिकाओं... and Happiness) लेखक : स्वामी ज्योतिर्मयानंद हिंदी अनुवाद : योगिरत्न डॉ. शशिभूषण मिश्र प्रकाशक : इंटरनेशनल योग सोसायटी...
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हिमालय पर ध्यान ...
घाटी का आकर्षक दृष्य है। चीड़ के लम्बे पेड़, हरे खेत, घुमावदार रास्ते, इनके साथ-साथ पर्वत से गिरती हुई शुद्ध जल वाली एक नदी और इन सबों से भी सुंदर इन के पीछे एक के बाद दूसरी हिमालय की बर्फिली चोटियाँ...
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हठयोग के स्वरूप का वर्णन ...
- स्वामी ज्योतिर्मयानंद की पुस्तक से अंश हठयोग के नियमित अभ्यास से आप अपना खोया हुआ स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। आत्मा की गुप्त शक्तियों... and Happiness) लेखक : स्वामी ज्योतिर्मयानंद हिंदी अनुवाद : योगिरत्न डॉ. शशिभूषण मिश्र प्रकाशक : इंटरनेशनल योग सोसायटी...
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ध्यान पर ध्यान दें ...
स्वर्ग, समस्त ब्रह्मांड, जलतत्व, पर्वत, मनुष्य और देवगण सभी ध्यान करते हैं। और केवल ध्यान के द्वारा ही ये सभी अपनी महानता और दिव्यता प्राप्त करते हैं। परंतु दुर्जन; जो ध्यान नहीं करते विवाद, कलह, लंप...
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षट्‍कर्म अथवा शुद्धिकारक क्रियाएँ ...
जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त हो सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। शरीर जीवात्मा का घर...
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जानें धौती कर्म को ...
जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त होता सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। इस बार जानें धौती...
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बस्ती और नौली क्रिया ...
जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त होता सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। इस बार जानें बस्त...
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बंध को जानें ...
के किसी एक भाग पर बाँधा जाता है। इसके अभ्यास से योगी प्राणों को नियंत्रित कर सफलता पूर्वक कुंडलिनी जाग्रत करता है। बंध और मुद्रा दोनों का अभ्यास साथ-साथ किया जाता है। पाँच प्रमुख बंध इस प्रकार हैं। 1...
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त्राटक और नेती क्रिया ...
जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। शरीरिक शुद्धि के बिना आसन-प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त होता सकता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। सर्वप्रथम जानें त...
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