हठयोग के लिए खोज परिणाम ( 1-10 )
इसे 'पावर योगा' न कहें ...
से प्राप्त न हो तो हठयोग ही एक मात्र विकल्प बच जाता है। हठयोग में अभ्यास का बहुत महत्व है। कहते हैं कि समाधि के पीछे इस कदर पड़ जाओ की हर दिन वह नजदीक... आती जाएँ। छोड़ना नहीं। हठयोग का अर्थ ही यह होता है कि पीछा नहीं छोड़ना।...
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हठयोग क्या है? ...
हठयोग शारीरिक और मानसिक विकास के लिए विश्व की प्राचीनतम प्रणाली है जिसका शताब्दियों से भारत के योगियों द्वारा अभ्यास किया गया है। मनोकायिक व्यायामों की यह एक अनन्यतम विधि है। हठयोग के आसन मानसिक प्रशांति, शारीरिक संतुलन और दिव्य प्रभाव के साथ प्रतिपादित होते हैं।...
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सिद्धि प्राप्त करने का स्थान ...
हठयोग की साधना कर रहे हैं तो जरा रुकें, हमारी भी सुनें। कहते हैं कि हठयोग आधारभूत है। दरअसल यह मोक्ष या सिद्ध‍ि तक पहुँचने का शॉर्टकट है। अधिकतर हठयोगहठयोग का प्रदर्शन करते हुए पाए जाएँगे, लेकिन यह सिर्फ सस्ती...
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योग के आयाम ...
गए है। (1) राजयोग, (2) हठयोग, (3) लययोग, (4) ज्ञानयोग, (5) कर्मयोग और (6) भक्तियोग। जिस क्रम में इन्हें लिखा गया है उसी क्रम में उनका दर्जा और महत्व भी... योग भी कहा जाता है। (2) हठयोग : षट्कर्म, आसन, मुद्रा, प्रत्याहार, ध्यान और समाधि- ये हठयोग के सात अंग है, लेकिन हठयोगी का जोर आसन एवं कुण्डलिनी जागृति...
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महायोगी गुरु गोरखनाथ ...
सिद्धों की भोग-प्रधान योग-साधना की प्रतिक्रिया के रूप में आदिकाल में नाथपंथियों की हठयोग साधना आरम्भ हुई। इस पंथ को चलाने वाले मत्स्येन्द्रनाथ (मछंदरनाथ) तथा गोरखनाथ (गोरक्षनाथ) माने जाते हैं।...
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आयुर्वेद एवं जलनेती ...
चिकित्सा के अनुरूप हठयोग शास्त्र में षटविध शोधन कर्म का उल्लेख किया गया है। हठयोग प्रदीपिका में 1. धैती, 2. बस्ति, 3. नेती, 4. त्राटक, 5. नौलिक, 6. कपालभाति... पर्याय रूप में हुआ है। हठयोग प्रदीपिका के अनुसार ये षट्कर्म गुप्त रखने योग्य हैं। ये शरीर को शुद्ध कर उसमें विचित्र गुणों का संधन करते हैं। योगियों को...
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हठयोग के स्वरूप का वर्णन ...
हठयोग के नियमित अभ्यास से आप अपना खोया हुआ स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। आत्मा की गुप्त शक्तियों को उद्घाटित कर अपनी संकल्पशक्ति में वृद्धि कर सकते हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर आत्मसाक्षात्कार के उत्कृष्ट शिखर पर आसीन हो सकते हैं।...
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कपालभाती प्राणायाम ...
कपालभाती प्राणायाम को हठयोग के षट्कर्म क्रियाओं के अंतर्गत लिया गया है। ये क्रियाएँ हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपाल भाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। इस बार जानें धौती कर्म को।...
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भारतीय दर्शन और योग ...
की है। वास्तव में आसन हठयोग का एक मुख्य विषय ही है। इनसे संबंधित 'हठयोग प्रतीपिका' 'घरेण्ड संहिता' तथा 'योगाशिखोपनिषद्' में विस्तार से वर्णन मिलता है।... ही है। इनसे संबंधित 'हठयोग प्रतीपिका' 'घरेण्ड संहिता' तथा 'योगाशिखोपनिषद्' में विस्तार से वर्णन मिलता है। 4. प्राणायाम : योग की यथेष्ट भूमिका के लिए नाड़ी...
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भारतीय दर्शन और योग ...
की है। वास्तव में आसन हठयोग का एक मुख्य विषय ही है। इनसे संबंधित 'हठयोग प्रतीपिका' 'घरेण्ड संहिता' तथा 'योगाशिखोपनिषद्' में विस्तार से वर्णन मिलता है।... ही है। इनसे संबंधित 'हठयोग प्रतीपिका' 'घरेण्ड संहिता' तथा 'योगाशिखोपनिषद्' में विस्तार से वर्णन मिलता है। (4). प्राणायाम: योग की यथेष्ट भूमिका के लिए...
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