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शुभ अशुभ ग्रह
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कुंभ लग्न शुभ अशुभ ग्रह
मिथुन लग्न शुभ अशुभ ग्रह
शुभ अशुभ ग्रह कन्या
वृश्चिक लग्न के लिए शुभ अशुभ ग्रह
ग्रहों की शुभ अशुभ
सोया भाग्य जगाएँ, भाग्यशाली बन जाएँ, ...
कि बच्चे के जन्म से ही
ग्रह
ों का खेल शुरू हो जाता है। बच्चा जब जन्म लेता है तो उस समय स्थित
ग्रह
ही उसे जीवन भर फल देते रहते है। चाहे वो किसी भी धर्म
...
धर्म का क्यों न हो, उसे
ग्रह
ों के अनुसार परिणाम मिलते हैं। फिर वो कहीं भी, किसी भी देश का क्यों न हो। ये तो सभी मानते हैं कि
ग्रह
ों का प्रभाव सभी पर समान
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/article/0911/18/1091118018_1.htm - 4412.00kb
- 4 दिन पहले
ग्रह
ों के विशिष्ट योग ...
कुंडली में
ग्रह
ों की स्थिति के अनुरूप मनीषियों ने इन्हें विशिष्ट योगों के नाम दिए हैं। 1. युति : दो
ग्रह
एक ही राशि में एक सी डिग्री के हों तो युति कहलाती
...
हों तो युति कहलाती है। अ
शुभ
ग्रह
ों की युति अ
शुभ
फल व
शुभ
ग्रह
ों की युति
शुभ
फल देती है। अ
शुभ
व
शुभ
ग्रह
की युति भी अ
शुभ
फल ही देती है। 2. लाभ योग : एक
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/navgrah/0906/30/1090630027_1.htm - 2438.00kb
मकर लग्न की विशेषताएँ ...
प्रति लगन होती है। शनि अ
शुभ
हो तो ये व्यक्ति गुस्सैल, स्वार्थी व स्वकेंद्रित होते हैं। दूसरों में गलतियाँ ढूँढना इन्हें प्रिय होता है। जीवनसाथी से अत्यधिक
...
देर से ही होता है।
शुभ
ग्रह
: शुक्र पंचमेश व दशमेश होकर, शनि लग्नेश व द्वितीयेश होकर तथा बुध नवमेश होकर कारक होते हैं। इनकी दशा-महादशा फलकारक होती है,
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/jyotish_sikhey/0905/05/109050502... - 1724.00kb
ग्रह
ों की स्थिति का सटीक कथन ...
> > > >
ग्रह
ों की स्थिति का सटीक कथन
ग्रह
ों की स्थिति का सटीक कथन भारती पंडि त WD कुंडली द्वारा फलित कथन करते समय कुछ सामान्य नियमों की जानकारी होना भी
...
है। उन्हीं के आधार पर
ग्रह
ों के बलाबल का निर्णय लेकर सटीक कथन (फलादेश) किया जा सकता है। जो
ग्रह
शत्रु क्षेत्री, पापी अथवा अस्त हो, वे अ
शुभ
फल प्रदान करते
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/navgrah/0808/26/1080826018_1.htm - 40.27kb
जब शुक्र-चन्द्र हो
शुभ
... ...
कब-कब आती है, जीवन में
ग्रह
भी कुछ देते हैं संकेत। इसके लिए चन्द्रमा जो मन का कारक है, उसका
शुभ
होना ही आवश्यक होता है। शुक्र का भी इसमें अहम स्थान होता
...
का होता है। इन सबका
शुभ
होना ही जीवन में हर्षोल्लास के लिए प्रभावी होता है। लग्न कोई भी हो उसका
शुभ
होना आवश्यक है। यदि वृषभ, तुला हो तो उसका स्वामी शुक्र
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/navgrah/0906/29/1090629018_1.htm - 3736.00kb
कर्क लग्न की विशेषताएँ ...
में सक्रिय होते हैं।
शुभ
ग्रह
: लग्नेश चंद्रमा, पंचमेश मंगल और भाग्येश बृहस्पति अति
शुभ
है। इनकी दशा-महादशाएँ अति लाभकारी होती है। यदि ये गुरु
ग्रह
कुंडली
...
होती है। यदि ये गुरु
ग्रह
कुंडली में अ
शुभ
स्थानों में हो तो उपाय अवश्य करें। मंगल प्रबल कारक
ग्रह
है। अ
शुभ
ग्रह
: बुध, शुक्र व शनि अ
शुभ
ता लिए होते हैं।
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/jyotish_sikhey/0902/24/109022401... - 1904.00kb
जब एकादश भाव में हो सूर्य ...
इस भाव में बैठा कोई भी
ग्रह
शुभ
परिणाम देता है ऐसी आम धारणा है। जबकि अनुभव में ऐसा नहीं पाया गया है। इस भाव में अ
शुभ
ग्रह
, नीचस्थ
ग्रह
, शत्रु क्षेत्री
...
में अ
शुभ
ग्रह
, नीचस्थ
ग्रह
, शत्रु क्षेत्री
ग्रह
व अ
शुभ
प्रभाव से ग्रस्त
ग्रह
कभी भी
शुभ
परिणाम नहीं देते। यहाँ से सन्तान, विद्या, प्रेम, मनोरंजन भाव पर
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/navgrah/0908/17/1090817004_1.htm - 3074.00kb
गुरु
ग्रह
का चक्र और लाल किताब ...
या खाने अनुसार गुरु के
शुभ
-अ
शुभ
प्रभाव को लाल किताब में विस्तृत रूप से समझाकर उसके उपाय बताए गए हैं। यहाँ प्रस्तुत है प्रत्येक भाव में गुरु की स्थित और
...
है। ऐसे व्यक्ति के शेष
ग्रह
यदि मंदे हों तो व्यक्ति सदा खानदान की चिंता में रहता है। रहस्यमय विद्याओं में रुचि लेता है। दौलत आती-जाती रहती है पर दौलतमंद
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/navgrah/0907/16/1090716059_1.htm - 4070.00kb
गुरु
ग्रह
का चक्र और लाल किताब ...
नर्क का सृजन करोगे। यदि अ
शुभ
केतु ग्यारहवें घर में हो तो औलाद से या औलाद के धन से उसे सुख नहीं मिल सकता। इसके लिए धर्म के नाम पर कभी किसी से कुछ भी न
...
है या नहीं। यदि शनि
शुभ
हो तो आर्थिक हालत ठीक होगी। इस जगह बृहस्पति यदि अ
शुभ
हो तो समझो कि बस जैसे-तैसे आम जरूरतें पूरी होती रहेंगी। केतु बारहवें में
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/navgrah/0907/16/1090716059_2.htm - 6000.00kb
ग्रह
ों की प्रकृति और स्वभाव ...
गुरु की पाँचवीं व नौवीं दृष्टि भी होती है। शनि तृतीय व दसवें स्थान को भी देखता है। मंगल चौथे व आठवें स्थान को देखता है। राहु-केतु भी क्रमश: पाँचवें और नौवें स्थान को पूर्ण दृष्टि से देखते हैं। फलादेश
...
hindi.webdunia.com/religion/astrology/jyotish_sikhey/0812/13/108121303... - 2208.00kb
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