आस्वादन के लिए खोज परिणाम ( 1-8 )
वेबदुनिया खोज परिणाम
रवींद्रनाथ ठाकुर का ऐतिहासिक पत्र ...
किशोर देव वर्मा को लिखे अपने पत्र में पश्चिमी सभ्यता के मोह में फँसे भारतवासियों की स्थिति का वर्णन किया है। तथाकथित शिक्षित मनुष्य भारत का उपहार करने में अपना गौरव समझते हैं। वे बर्बरता को ही सभ्यता...
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यह पेज प्रिंट करें आस्वादन - परिचय दास GN भारतीय दलित साहित्य अकादमी से सम्मानित परिचय दास देवलास जिला आजमगढ़ में जन्मे। हिंदी में एम.ए. और गोरखपुर विवि... वाली गंध का करता हूँ आस्वादन कभी-कभी तीखी बयार यहाँ से गुजरती है आलोचकों द्वारा कविता की समीक्षा किए जाने जैसी GN सूखी पत्तियों पर ढलता सूर्य-बिंब जैसे...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/nri/nrilitrature/0806/24/1080624037_1... - 24.84kb
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मंदिर में महामंत्र णमोकार की एक पंक्ति को दूसरी पंक्ति की साक्षात्‌ वंदना करते देखा। अरिहंत प्रसन्न मुद्रा में मूर्तियों में मग्न थे साधुगण साधना की प्रतिपूर्ति में नग्न थे। भक्तगण परमानंदित भव्य दृश...
vidyasagar.net/jaindharm/aalekh/namokar.htm - 12.74kb
KHAPRE | केशव भट्ट काश्मीरी ...
चरण - चिन्तन माधुर्यका आस्वादन ही भवसागरसे आगम - निगम सभी शास्त्र श्रीकृष्णकी महिमाका कीर्तन गति हैं । वे ही जगतके जीवनस्वरुप हैं । जिस व्यक्तिकी मतिगतिश्रीकृष्णचरणमें... शास्त्रके वास्तविक रसका आस्वादन नहीं कर सकता । श्रीकृष्णका भजन छोड़कर जो व्यक्ति शास्त्रकी आलोचनामें ही कुशल है, वह निरे गदहेके समान ज्ञान - भारका वहन...
khapre.in/portal/url/hi/vyakti/ka/z90428025204(के�%a... - 56.92kb
कनुप्रिया (सृष्टि-संकल्प – आदिम भय) « Hindi Poetry ...
ही लीलातन है तुम्हारे आस्वादन के लिए- अगर ये उत्तुंग हिमशिखर मेरे ही – रुपहली ढलान वाले गोरे कंधे हैं – जिन पर तुम्हारा गगन-सा चौड़ा और साँवला और तेजस्वी... मेरा लीलातन है तुम्हारे आस्वादन के लिए तो यह जो भयभीत है – वह छायातन किसका है? किस लिए है मेरे मित्र?...
hindipoetry.wordpress.com/2005/12/03/33/ - 27.79kb
KHAPRE | केशव भट्ट काश्मीरी ...
चरण - चिन्तन माधुर्यका आस्वादन ही भवसागरसे आगम - निगम सभी शास्त्र श्रीकृष्णकी महिमाका कीर्तन गति हैं । वे ही जगतके जीवनस्वरुप हैं । जिस व्यक्तिकी मतिगतिश्रीकृष्णचरणमें... शास्त्रके वास्तविक रसका आस्वादन नहीं कर सकता । श्रीकृष्णका भजन छोड़कर जो व्यक्ति शास्त्रकी आलोचनामें ही कुशल है, वह निरे गदहेके समान ज्ञान - भारका वहन...
khapre.in/portal/url/hi/vyakti/ka/z90428212959(के�%a... - 56.99kb
ब्लागर भाई.बहनों और पाठकों से विदाई « गत्यात्मक ज्योतिष् ...
ब्लागर भाई.बहनों और पाठकों से विदाई- जगत में चल रहे मेरे क्रियाकलापों की गति पिछले महीनें से ही काफी धीमी हो गयी है और मार्च में लगभग सुसुप्त सी भी रह सकती है। इससे दूर होकर मुझे काफी खालीपन का अहसास हो रहा है , किन्तु फिर भी इसपर धयान....
gatyatmakjyotish.wordpress.com/2008/03/07/ब्ल%... - 76.84kb
Sanjh by Jagdish Gupt ...
पायल की॥३१॥ स्वगर्ंंगा की लहरों में, शशि ने छिप जाना चाहा। जिस दिन प्यासे नयनों ने, उस रूप-सिंधु को थाहा॥३२॥ किस रूप-सिंधु को मथ कर, विधि ने मुख-इंदु निकाला। विष के प्रभाव से जल कर, हो गई श्याम कच-मा...
anubhuti-hindi.org/gauravgranth/saanjh/sanjh2.htm - 47.56kb
दिल्ली से ...
भवन में सायं ६ ०० बजे दिशा फ़ाउंडेशन द्वारा ‘दस्तक नई पीढ़ी की’ नाम से एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हिंदी कवि-सम्मेलन मंच के लिये नई प्रतिभाओं की खोज के एक प्रयास के रूप में आयोजित कि...
abhivyakti-hindi.org/samachar/2008/samachar41.htm - 39.40kb