जान लेने का हक़ नहीं वरना, हमारी पसंद, अशफ़ाक अंजुम, Urdu sahitya, hamaree pasand के लिए खोज परिणाम ( 1-1 )
जान लेने का हक़ नहीं वरना ...
के हक़ में होते हैं मैं अभी तक इसी गुमान में था---- अशफ़ाक़ अंजुम बहुत गोहर है मिट्टी में हमारी सलीक़े से मगर छानी तो जाए ----- अशफ़ाक़ अंजुम तीरगी जिससे फेले बनामे-सहर ऎसे सूरज की मोजूदगी मौत है------साले...
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