तुम्हीं हो डोर बिटिया के लिए खोज परिणाम ( 1-2 )
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शायिर ‘नज़र’ की शायिरी का उद्भव [The Creation of Poetry of Poet 'Nazar']- खु़द को देखूँ 16 Dec तुम्हीं से Posted by विनय in . मेरी ग़ज़ल Leave a Comment शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ प्यार है तुमसे तुम्हीं से सिर्फ़ तुम्हीं से मेरी... तुमसे तुम्हीं से सिर्फ़ तुम्हीं से मेरी बेक़रारियों को क़रार है तुम्हीं से सहर-शब सुबहो-शाम सब तुम्हीं से सीने में दिल दिल में धड़कन तुम्हीं से मेरी मंज़िल...
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तुम्हीं हो डोर बिटिया (तुम्हीं हो डोर बिटिया) ...
क्यों समझती खुद को तुम कमजोर बिटिया?- को तुम कमजोर बिटिया? अपनी ताकत पर करो तुम गौर बिटिया। सृष्टि में तुम सूर्य की पहली किरण हो रोशनी का तुम सुनहरा भोर बिटिया। मंदिरों की घंटियों की गूँज हो तुम शक्ति की पूजा का तुम्हीं ठौर बिटिया। धर्म,...
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