प्यार को वरदान, इश्क, प्रेम, मोहब्बत, रोमांस के लिए खोज परिणाम ( 1-6 )
जितना नूतन प्यार तुम्हारा ...
द्वार और अगवानी तुमने जितनी संज्ञाओं से, मेरा नामकरण कर डाला मैंने उनको गूँथ-गूँथकर साँसों की अर्पण की माला जितना तीखा व्यंग्य तुम्हारा, उतना मेरा अंतर मानी एक साथ कैसे रह पाए, मन में आग नयन में पानी...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/romance/lovesong/0910/06/1091006105_1... - 1268.00kb
अठारह बरस ...
है मुझसे नहीं बनी कोई प्रेम कविता पर असल में मैं एक अच्छी प्रेम कविता ही तो लिखना चाहता था जिसे पाने के लिए अब तक क्या-क्या नहीं लिखा भागते-भागते हाँफते-हाँफते।... पर असल में मैं एक अच्छी प्रेम कविता ही तो लिखना चाहता था जिसे पाने के लिए अब तक क्या-क्या नहीं लिखा भागते-भागते हाँफते-हाँफते।...
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वरना हम भी आदमी थे काम के :: प्रेसनोट डाट इन | आपकी ...
24 Feb, 2009 09:51 PM इश्क ने गालिब निकम्मा कर दिया वरना हम भी आदमी काम के। मियां गालिब ने जब यह शेर लिखा होगा, वह समय कुछ ओर था, उस समय का इश्क पाक दामन,... कुछ ओर था, उस समय का इश्क पाक दामन, इबाबत का दूसरा रूप माना जाता था। जहां इज्जत सरेआम नीलाम नहीं होती थी। जान जुदा हो जाए, पर दामन में दाग नहीं लगता था।...
pressnote.in/hindi/readnews.php?id=41455 - 55.26kb
वरना हम भी आदमी थे काम के :: प्रेसनोट डाट इन | आपकी ...
हम भी आदमी थे काम के इश्क ने गालिब निकम्मा कर दिया वरना हम भी आदमी काम के। मियां गालिब ने जब यह शेर लिखा होगा, वह समय कुछ ओर था, उस समय का इश्क पाक दामन,... कुछ ओर था, उस समय का इश्क पाक दामन, इबाबत का दूसरा रूप माना जाता था। जहां इज्जत सरेआम नीलाम नहीं होती थी। जान जुदा हो जाए, पर दामन में दाग नहीं लगता था।...
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मोहब्बत ने सदा की तो « तख़लीक़-ए-नज़र ...
शायिर ‘नज़र’ की शायिरी का उद्भव [The Creation of Poetry of Poet 'Nazar']- में न लगा जी 1 Dec मोहब्बत ने सदा की तो Posted by विनय in .Tagged: . मेरी ग़ज़ल ख़ुशी हुस्न इश्क़ दर्द बेताब heart love मौसम दिल डर प्यार फ़िज़ा मोहब्बत pain... heart love मौसम दिल डर प्यार फ़िज़ा मोहब्बत pain बहार दुनिया सदा shadow beauty आँसू season moon चार-सू warm tears रूप सहारा mad बेज़ार माह साया sun happiness...
vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/01/mohabbat-ne-sadaa-kii-to/ - 131.41kb
तू आँचल है एक ख़ूबसूरत-सी मोहब्बत का « तख़लीक़-ए-नज़र ...
शायिर ‘नज़र’ की शायिरी का उद्भव [The Creation of Poetry of Poet 'Nazar']- आँचल है एक ख़ूबसूरत-सी मोहब्बत का Posted by विनय in . मेरी ग़ज़ल Leave a Comment शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००२ तू मुझसे मोहब्बत करती हो तो... वर्ष: २००२ तू मुझसे मोहब्बत करती हो तो क्या होगा मानूस-सा मौसम इक बार फिर हरा होगा रोज़-रोज़ नये बहाने ढूँढ़ती हो क़रीब आने के गर इज़हार कर दो यह इश्क़ और...
vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/16/तू-आ%e... - 116.77kb
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