ब्लॉग चर्चा , रवींद्र व्यास, पुखराज के चाँद, इश्क की रोशनी, के लिए खोज परिणाम ( 1-6 )
पुखराज के चाँद से निकलती इश्क की रोशनी ...
बना दिया। उनका एक ब्लॉग है पारूल...चाँद पुखराज का। इसकी एक पोस्ट कोहरा-रूमानियत में वे रूमानी होकर कोहरे को, कोहरे में बिताए लम्हों को याद करती हैं। कोहरे... भी जाएँ तो पारूल के इस ब्लॉग पर इश्क-मोहब्बत की बेहतरीन चीजें पढ़ने और सुनने को मिलती हैं। इसमें सुगम संगीत भी है, लोक संगीत भी है और शास्त्रीय संगीत...
hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0901/09/1090109058_1.htm - 6778.00kb
प्रेम के रूप-रंग और महक ...
से लेकर पोस्टें और फोटो इन्हीं भावों के ईर्दगिर्द हैं। यहाँ इश्क, प्रीत, लव की बातें हैं लेकिन इसकी खूबी यह है कि यहाँ किसी भी तरह की दार्शनिकता से परहेज किया गया है और इश्क के भावों को, उसकी आत्मा क...
hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0910/02/1091002014_1.htm - 4182.00kb
रवींद्र स्वप्निल प्रजापति की कविताएँ ...
मैं इश्क का दिन हुआ मैं इश्क का दिन हुआ तुम उसमें रोशनी हुईं मैं आकाश हुआ गमों की रात का तुम उसमें चाँद की किरन हुईं मैं लंबा सफ़र हूँ दुनिया का तुम मेरे सफ़र का साथ हुईं मैं एक खिड़की का काँच हूँ तुम दूर से पास आती लहर हुईं मैं किस्सा हूँ वक्त पर लिखा तुम उसमें खूबसूरत ज़िक्र हुईं...
anubhuti-hindi.org/kavi/r/rsp/main.htm - 25.87kb
गुलज़ार ...
कविता संग्रह- एक बूँद चाँद (१९७०), कुछ और नज़्में (१९८०), पुखराज (१९९४), मेरा कुछ सामान (१९९४) उर्दू में- जानम (१९६२), चाँद पुखराज का (१९९५), उर्दू हिंदीः... में- जानम (१९६२), चाँद पुखराज का (१९९५), उर्दू हिंदीः त्रिवेणी (२००१) कहानी संग्रह- चौरस रात(उर्दू) (१९९६३), दुआएँ (उर्दू)(१९९७), रावीपार (हिंदी, अंग्रेज़ी)...
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शाम गहरी हो रही थी « तख़लीक़-ए-नज़र ...
शायिर ‘नज़र’ की शायिरी का उद्भव [The Creation of Poetry of Poet 'Nazar']- नज़्म इश्क़ ख़्याल खिड़की चाँद छत तन्हाई पुरवाई प्यार बादल बारिश मकान मोहब्बत मौसम रोशनी शाम सुनहरा breeze care cloud evening golden house light love moon... गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों से झाँक रहा था छत पे था मैं और पुरवाई बह रही थी तेरा ख़्याल और मैं और मेरी तन्हाई थी मौसम भी आ गया था बादल भी आ गये...
vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/shaam-gaharii-ho-rahii-thii/ - 111.85kb
ज़ुलेख़ा « तख़लीक़-ए-नज़र ...
शायिर ‘नज़र’ की शायिरी का उद्भव [The Creation of Poetry of Poet 'Nazar']- . मेरी नज़्म चाँद धूप इश्क़ love flower पलाश दिलबर प्यार याद चेहरा मोहब्बत रात शाम तन्हा बेवजह फूल dream शिकवा desire fragrance alone care memory पलकें night moon river evening sunlight dhak butea परवा...
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