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माँ की यादों के सघन रेशमी आँचल में ...
पर अमल भी। शायद उनका यह ब्लॉग उनके नई राह और अलग राह पर चलने की जिद का एक सार्थक परिणाम है। इसी पर उन्होंने अपनी माँ की एक और मार्मिक कविता पोस्ट की है।... छल-छल कविता है यह। इस ब्लॉग पर जाना ऐसा लगता है जैसे हम अपनी ही माँ के उस कमरे में से होकर आ रहे हैं जो उनके जाने के बाद अक्सर ही अंधेरे में बंद रहता...
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माँ की यादों के सघन रेशमी आँचल में ...
और यह ब्लॉग भूलने के विरूद्ध है। यह ब्लॉग याद रखने का है। इस ब्लॉग पर अनुराग अपनी माँ को याद करते हैं। बार बार याद करते हैं। कई तरह से याद करते हैं। जीवन की धूप-छाँव में याद रखते हैं। यहाँ वे अपनी मा...
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