माथे झिलमिलाती बिंदिया के लिए खोज परिणाम ( 1-7 )
माथे पर झिलमिलाती बिंदिया (माथे झिलमिलाती बिंदिया) ...
गायत्री शर्मा ND ND बिंदी भारतीय नारी के सौंदर्य व अमर सुहाग का प्रतीक है। माथे पर चाँद सी चमकती लाल, काली बिंदिया भी आज फैशन के कलेवर में ढलकर रंग-बिरंगी, चमकीली और आकर्षक बन गई है। वर्क के हिसाब से...
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बिंदिया के तीन रूप « अनुभूति कलश ...
Leave a Comment-बिंदिया के तीन रूप (1) अलसाये नयनों में निंदिया, भावों के झुरमुट मचलाए घूंघट से मुख को जब खोला, आंखों का अंजन इतराए फूल पर जैसे शबनम चमके, दुलहन के माथे... शबनम चमके, दुलहन के माथे पर बिंदियामाथे पर छोटी सी बिंदिया ! (2) पांव में घुंघरू, यौवन छलके, तबले पर ता थइ ता थैया पलक मार मधुमास बना दे, कुछ नोटों...
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Anubhuti-A complete classic collection of Hindi Poetry ...
से आँचल में चाँद-सी बिंदिया झिलमिलाती है। नदिया-सी इठलाती है ज़िंदगी उसकी रोटियों में बिलता है श्रम ज़िंदगी का वह भरपेट सोती अपनी दुनिया को देखती है उसका... में चाँद-सी बिंदिया झिलमिलाती है। नदिया-सी इठलाती है ज़िंदगी उसकी रोटियों में बिलता है श्रम ज़िंदगी का वह भरपेट सोती अपनी दुनिया को देखती है उसका चाँद...
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आँखों में काजल माथे पे बिंदिया « तख़लीक़-ए-नज़र ...
शायिर ‘नज़र’ की शायिरी का उद्भव [The Creation of Poetry of Poet 'Nazar']- 10 Jan आँखों में काजल माथे पे बिंदिया Posted by विनय in . मेरा गीत १ टिप्पणी शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००१-२००२ आँखों में काजल माथे पे बिंदिया... आँखों में काजल माथे पे बिंदिया केश हैं रातें मुखड़ा है चन्दा जब-जब तुझपे नज़रें मैं डालूँ चल जाये मोरे दिल पे कटरिया आहा सँवरिया, आहा सँवरिया… साँसों की...
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इश्क जब एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है « Their Words, Their ...
Archives- तो मज़ा देता है। अपने माथे पे ये बिंदिया की चमक रहने दो ये सितारा मुझे मंज़िल के पता देता है। ऐ नमकपाश तेरी साँवली सूरत की क़सम दिल का हर ज़ख़्म तुझे... है। अपने माथे पे ये बिंदिया की चमक रहने दो ये सितारा मुझे मंज़िल के पता देता है। ऐ नमकपाश तेरी साँवली सूरत की क़सम दिल का हर ज़ख़्म तुझे दिल से दुआ देता...
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हम ख़ाब से डूबे « तख़लीक़-ए-नज़र ...
शायिर ‘नज़र’ की शायिरी का उद्भव [The Creation of Poetry of Poet 'Nazar']- » आँखों में काजल माथे पे बिंदिया 10 Jan हम ख़ाब से डूबे Posted by विनय in . मेरा गीत Leave a Comment शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००१-२००२ हम... आँखों में काजल माथे पे बिंदिया 10 Jan हम ख़ाब से डूबे Posted by विनय in . मेरा गीत Leave a Comment शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००१-२००२ हम...
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छोटी सी बिंदिया ! -3 क्षणिकाए « मंथन ...
23 Responses to this post.- 22 Jun छोटी सी बिंदिया ! -3 क्षणिकाए Posted by महावीर in , . कविता महावीर शर्मा 23 टिप्पणियां छोटी सी बिंदिया ! -3 क्षणिकाएं - महावीर शर्मा दुलहन अलसाये... जैसे शबनम चमके,दुलहन के माथे पर बिंदिया। मुस्काए माथे पर बिंदिया। मुजरा तबले पर ता थइ ता थैया, पांव में घुंघरू यौवन छलके मुजरे में नोटों की वर्षा, बार...
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