मुनव्वर राना, मुनफ़रिद अशआर, शेर के लिए खोज परिणाम ( 1-4 )
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता ...
किसी को कोई रास्ता नहीं देता मुझे गिरा के अगर तुम संभल सको तो चलो ---निदा फ़ाज़ली मौत उसकी है करे जिसका ज़माना अफ़सोस यूँ तो दुनिया में सभी आए हैं मरने के लिए मौत हर शाह-ओ-गदा के ख़्वाब की ताबीर है इस सित...
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माँ और मुनव्वर राना « रत्ना की रसोई ...
माँ और मुनव्वर राना- कुमार विश्वास माँ और मुनव्वर राना May 18, 2007 · 27 टिप्पणियां मातृ दिवस के अवसर पर मुनव्वर राना साहिब की किताब “ माँ ” की समीक्षा लिखना चाह रही थी पर... मुतासिर होकर मैं, जिनाब मुनव्वर राना के तसुव्वर से तामीर हुई “ माँ ” से आपकी एक मुलाकात करवाने को, हाज़िर हूँ। मेरे विचार में यह किताब रूसी लेखक मैक्सिम...
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पहली दर्शनीय सफलता « रत्ना की रसोई ...
पहली दर्शनीय सफलता- के नाम → एक शाम मुनव्वर राना के नाम पहली दर्शनीय सफलता October 23, 2006 · Leave a Comment काव्य-संध्या की एक झलक— शेष फिर– Categories: बस यूँ ही... के नाम → एक शाम मुनव्वर राना के नाम पहली दर्शनीय सफलता October 23, 2006 · Leave a Comment काव्य-संध्या की एक झलक— शेष फिर– Categories: बस यूँ ही...
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सायादार पेड़ ज़माने के काम आए जब सूखने लगे तो जलाने के काम आए * कोयल बोले या गोरैया अच्छा लगता है अपने गाँव में सब कुछ भैया अच्छा लगता है * उड़ने से परिन्दे को शजर रोक रहा है घरवाले तो ख़ामोश हैं घर रोक ...
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