विदेशी कविता, एनआरआई, प्रवासी कविता, रहस्य,, foreign poetry, NRI, Overseas poetry के लिए खोज परिणाम ( 1-3 )
जीवन का आँचल ...
मेरे जीवन का आँचल मैं बन भिक्षुणी स्नेहांजलि लिए दिन भर भटकती ही रही पा सकी न प्रेम-भिक्षा झोली मेरी खाली ह‍ी रह‍ी गेरुएपन की आड़ में रक्त-ह्रदय का छिपात‍ी ही रही थोड़ा कुछ पा जाने की आस में सर्वस्व ...
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शहनाज : एक और दो ...
थी उतरा था जिस पे बाबे-हया1 का वर्क2-वर्क बिस्तर की एक-एक शिकन की शरीक थी मैं एक एतिबार से आतिश-परस्त3 था वह सारे जावियाँ4 से चमन की शरीक थी। वह नाजिशे-सितारा-ओ-तन्नाज माहताब5 गर्दिश के वक्त मेरे गहन...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/nri/nrilitrature/0910/24/1091024071_1... - 2864.00kb
भारत आकर विदेशी ब्रांड खरीदते हैं एनआरआई - Business ...
इस नए रुख के चलते अब एनआरआई बहुत कम सामान के साथ भारत आते हैं। भारत आकर विदेशी ब्रांड खरीदते हैं एनआरआई लंदन, एजेंसी First Published:15-09-09 08:30 PM... कि आज भारत में लगभग हर विदेशी ब्रांड उपलब्ध है। एक समय ऐसा भी था जब भारत में फारेन को काफी महत्व दिया जाता था। यदि कोई प्रवासी भारतीय (एनआरआई) अपने दोस्तों,...
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