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ज़िंदगी उलझी रही ग़ज़ल सतपाल
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संबंधित खोज
सतपाल
सतपाल ख़याल
सतपाल महाराज
अज़ीज़ अंसारी ग़ज़ल सुल्तान सुबहानी
ग़ज़ल फ़िराक़
तुझे ज़िंदगी यूँ बिता कर चले ...
भी तन्हा अँधेरे में हम तो मुट्ठी में जुगनू छुपा कर चले,
ग़ज़ल
की भला क्या करूँ सिफ़त मैं ये क़ूचे में दरिया उठा कर चले, हर एक मोड़ पर थी बदी दोस्तों चले जब भी दामन बचा कर चले, कभी दोस्ती और कभी दुश्मनी
...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/poems/0910/20/1091020096_1... - 940.00kb
Dr. Rama Singh ...
राह देखेंगे तेरी रात से
उलझी
रही
वो चाह देखेंगे तेरी दुख का विप पीकर भी तूने प्यार ही बाँटा सदा फिर भी जो उपजी है मन में राह देखेंगे तेरी पास आकर एक सागर
...
तेरी रात से
उलझी
रही
वो चाह देखेंगे तेरी दुख का विप पीकर भी तूने प्यार ही बाँटा सदा फिर भी जो उपजी है मन में राह देखेंगे तेरी पास आकर एक सागर से नदी ने
...
anubhuti-hindi.org/anjuman/r/rama_singh/e_subah.htm - 23.15kb
मैं मुब्तिला हूँ अपनी हसरतों में « तख़लीक़-ए-नज़र ...
शायिर ‘नज़र’ की शायिरी का उद्भव [The Creation of Poetry of Poet 'Nazar']-
आज सपना बन गयी ज़ीस्त
उलझी
रही
फ़ितरतों में जीत लूँ सारा ज़माना तेरे नाम से देखो अब हौसला मेरी ज़ुर्रतों में Respond
...
सपना बन गयी ज़ीस्त
उलझी
रही
फ़ितरतों में जीत लूँ सारा ज़माना तेरे नाम से देखो अब हौसला मेरी ज़ुर्रतों में Respond
...
vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/17/मैं-%e... - 116.68kb
"गजल कराती है वास्तविक जिंदगी का एहसास" – जगजीत सिंह ...
05.07.07-
Amarjeet Singh ghazal ghazals jagjit jagjit singh live live concert singh जगजीत सिंह दुर्गापुर (बर्द्धमान)। एक अर्से बाद रानीगंज आये गजल सम्राट यहां के लोगों के प्रेम और संगीत के प्रति लगाव से गदगद
...
jagjitsinghnews.wordpress.com/2007/05/07/गजल-%... - 31.19kb
हमारी साँसों में आजतक वो « Their Words, Their Voice ...
Archives-
वो हिना की ख़ुशबू महक
रही
है। लबों पे नग़में मचल रहे हैं नज़र से मस्ती छलक
रही
है। कभी जो थे प्यार की ज़मानत वो हाथ हैं ग़ैर की अमानत जो कसमें खाते थे
...
की उन्हीं की नीयत बहक
रही
है। किसी से कोई गिला नहीं है, नसीब ही में वफ़ा नहीं है जहाँ कहीं था हिना को खिलना हिना वहीं पे महक
रही
है। वो जिनकी ख़ातिर
ग़ज़ल
...
ghazallyrics.wordpress.com/2005/07/21/hamari-saanson-mein/ - 70.76kb
ज़िंदगी
उलझी
रही
(ज़िंदगी
उलझी
रही
ग़ज़ल
सतपाल
) ...
खौफ़ से सहमी हुई है खून से लथपथ पड़ी-
ज़िंदगी
उलझी
रही
ज़िंदगी
उलझी
रही
सतपाल
ख्याल ND ND खौफ़ से सहमी हुई है खून से लथपथ पड़ी अब कोई मरहम करो घायल पड़ी है ज़िंदगी। पुर्जा-पुर्जा उड़ गए कुछ लोग कल
...
उलझन थी जो सारी ज़िंदगी
उलझी
रही
। अपना ही घर लूटकर खुश हो रहें हैं वो ख्याल आग घर के ही चरागों से है इस घर मे लगी।
...
hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/poems/0809/20/1080920015_1... - 23.87kb
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